गौरेला पेंड्रा मरवाही/मरवाही। सरकारी पैसे से निजी जमीन चमकाने का खेल? भस्कुरा में “जी राम जी योजना” के नाम पर बड़ा खेल! निजी खसरे पर बन रहा लाखों का चेक डैम, घटिया निर्माण से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
समुदाय के लिए सीमेंट कांक्रीट चेक डेम निर्माण कार्य बहरानाला”

गौरेला पेंड्रा मरवाही/मरवाही। महात्मा गांधी नरेगा की “जी राम जी योजना” अब सवालों के घेरे में है। जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत भस्कुरा में लगभग ₹19 लाख 98 हजार 81 की लागत से बन रहे “समुदाय के लिए सीमेंट कांक्रीट चेक डेम निर्माण कार्य बहरानाला” में भारी गड़बड़ी और नियमों की खुलेआम हत्या के आरोप लगे हैं।
आरोप है कि जिस चेक डैम को सामुदायिक हित और शासकीय उपयोग के नाम पर बनाया जा रहा है, वह असल में निजी भूमि पर खड़ा किया जा रहा है। सामने आए राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक निर्माण स्थल खसरा नंबर 745/2, रकबा 0.1460 हेक्टेयर है, जो शिवआधार पिता समरथ के नाम दर्ज बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, भूमि का जोत प्रकार भी “अकेला” दर्ज है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी योजना का पैसा निजी जमीन पर किसके इशारे पर बहाया जा रहा है?

ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा मामला “सरकारी फंड से निजी फायदा” पहुंचाने का खेल बन चुका है। नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कराया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंख बंद कर बैठे हैं। लोगों का कहना है कि यदि यह सामुदायिक निर्माण है तो फिर शासकीय भूमि छोड़ निजी खसरे का चयन क्यों किया गया?
मामले में एक और बड़ा आरोप गुणवत्ताहीन निर्माण को लेकर सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, तकनीकी मापदंडों की अनदेखी हो रही है और लाखों की राशि सिर्फ कागजों में “मजबूत निर्माण” दिखाने में खर्च की जा रही है। लोगों ने आशंका जताई है कि पहली बारिश में ही निर्माण की पोल खुल सकती है।

अब सवाल सिर्फ एक चेक डैम का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली का खड़ा हो गया है। आखिर किस अधिकारी ने निजी भूमि पर निर्माण की अनुमति दी? किस तकनीकी अमले ने स्वीकृति दी? और किसकी शह पर सरकारी राशि को निजी जमीन पर उड़ाया जा रहा है?
मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को शिकायत सौंपकर निर्माण कार्य पर तत्काल रोक, तकनीकी जांच, भूमि सत्यापन और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं के नाम पर खुला भ्रष्टाचार माना जाएगा।










